व्यवसाय सुगमता (Ease of Doing Business) हेतु डिजिटल रूपरेखा

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था

समाचार में

  • भारत ने डिजिटल परिवर्तन का लाभ उठाकर व्यापार वृद्धि को प्रोत्साहित किया है, विनियमों को सुव्यवस्थित किया है, पारदर्शिता को बढ़ाया है और व्यवसाय सुगमता (Ease of Doing Business) में सुधार किया है।

व्यापार पंजीकरण एवं नियामक ढाँचा

  • भारत का उन्नत डिजिटल अवसंरचना व्यापार पंजीकरण को सरल बनाती है, जिससे प्रवेश को सुगम बनाने वाला वातावरण तैयार होता है।
  • केंद्रीय प्लेटफॉर्म को राज्य-स्तरीय सुधारों के साथ समन्वित कर भारत उद्यमियों और व्यापारियों को विकास हेतु एक कुशल, पारदर्शी एवं विश्वसनीय मार्ग प्रदान करता है।
व्यापार पंजीकरण एवं नियामक ढाँचा

विभिन्न कदम

  • कॉर्पोरेट शासन एवं व्यापार नियामक प्रणाली:
    • MCA21 परियोजना: कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय की MCA21 परियोजना एक एआई-संचालित प्लेटफॉर्म है, जो 2006 से कंपनी और LLP सेवाओं में पारदर्शिता और व्यापार सुगुमता को बढ़ा रही है।
      • संस्करण 3 में ई-जांच, ई-निर्णयन, ई-परामर्श, अनुपालन प्रबंधन, MCA लैब, संज्ञानात्मक चैटबॉट, मोबाइल ऐप्स, डैशबोर्ड, बेहतर UI/UX और API-आधारित डेटा साझाकरण जैसी सुविधाएँ जोड़ी गई हैं।
    • व्यावसायिक सुधार कार्य योजना (BRAP): 2015 से लागू, BRAP राज्यों के बीच नियामक आवश्यकताओं की तुलना करता है और अनुपालन बोझ को कम करने तथा व्यापार-अनुकूल वातावरण बनाने हेतु उन्हें प्रोत्साहित करता है।
    • SPICe+ फॉर्म : एकीकृत वेब फॉर्म जो 3 केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और 3 राज्य सरकारों (महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल) तथा NCT-दिल्ली द्वारा 11 सेवाएँ प्रदान करता है।
    • राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली (NSWS): यह डिजिटल प्लेटफॉर्म व्यापार आवश्यकताओं के अनुसार अनुमोदन की पहचान और आवेदन में मार्गदर्शन करता है।
    • PARIVESH 3.0: पर्यावरण और वन स्वीकृतियों हेतु डिजिटल प्लेटफॉर्म।
  • MSME एवं उद्यमी समर्थन प्रणाली:
    • उद्यम पंजीकरण पोर्टल: इसने 7.71 करोड़ MSME पंजीकरण सक्षम किए हैं और 33.97 करोड़ रोजगारों का समर्थन किया है। यह एक निःशुल्क, पेपरलेस, स्व-घोषणा प्रणाली है जो CBDT और GSTN डेटाबेस से एकीकृत है।
    • TReDS (व्यापार प्राप्य छूट प्रणाली): MSMEs की व्यापार देयताओं के वित्तपोषण/डिस्काउंटिंग हेतु बहु-वित्तपोषकों के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म।
    • GeM (सरकारी ई-मार्केटप्लेस): डिजिटल खरीद प्रणाली जो देशभर के विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं को जोड़ती है, जिनमें महिला उद्यमी, स्टार्टअप, सूक्ष्म एवं लघु उद्यम, कारीगर, स्वयं सहायता समूह और दिव्यांगजन शामिल हैं।
  • व्यापार सुविधा एवं निर्यात संवर्धन प्लेटफॉर्म:
    • ICEGATE (भारतीय सीमा शुल्क इलेक्ट्रॉनिक गेटवे): सीमा शुल्क निकासी और इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग हेतु इंटरफ़ेस।
    • eCoO 2.0 (उन्नत मूल प्रमाण पत्र): निर्यात हेतु डिजिटल प्रमाणपत्र प्रणाली।
    • ट्रेड कनेक्ट ई-प्लेटफ़ॉर्म: निर्यातकों को वैश्विक व्यापार जानकारी और सेवाएँ प्रदान करता है।
  • लॉजिस्टिक्स एवं अवसंरचना संपर्क प्लेटफॉर्म:
    • PM गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान: एकीकृत अवसंरचना योजना प्लेटफॉर्म।
    • राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स पोर्टल (Marine): डिजिटल समुद्री लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म।
    • लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (LDB 2.0): वास्तविक समय में माल और कंटेनर ट्रैकिंग प्रणाली।
  • डिजिटल कराधान एवं अनुपालन प्रणाली:
    • GST नेटवर्क(GSTN): GST प्रशासन हेतु आईटी आधार।
    • ई-वे बिल प्रणाली: माल परिवहन हेतु इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज़।
  • डिजिटल वाणिज्य पारिस्थितिकी तंत्र:
    • ONDC (डिजिटल कॉमर्स के लिए ओपन नेटवर्क): वस्तुओं और सेवाओं के आदान-प्रदान हेतु खुले नेटवर्क को बढ़ावा देने की पहल।
    • GeM: सरकारी खरीद मार्केटप्लेस।
  • डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI):
    • UPI (एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस): त्वरित वास्तविक समय डिजिटल भुगतान।
    • cKYC Registry: वित्तीय सेवाओं हेतु केंद्रीकृत KYC डेटाबेस।

महत्व

  • आर्थिक विकास चालक: नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाता है, नौकरशाही विलंब को कम करता है और उद्यमिता को प्रोत्साहित करता है।
  • पारदर्शिता एवं जवाबदेही: डिजिटल प्लेटफॉर्म मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम करते हैं, भ्रष्टाचार को रोकते हैं और निष्पक्ष प्रथाओं को सुनिश्चित करते हैं।
  • MSME सशक्तिकरण: उद्यम पोर्टल छोटे व्यवसायों को आसान पंजीकरण और योजनाओं तक पहुँच प्रदान करता है।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा: भारत के सुधारों को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाता है, जिससे विदेशी निवेश आकर्षित होता है।
  • नागरिक-केंद्रित शासन: अनुपालन और लेन-देन को सहज बनाकर संस्थाओं में विश्वास बढ़ाता है।

चुनौतियाँ

  • ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे व्यवसायों को तकनीक तक सीमित पहुँच या डिजिटल साक्षरता की कमी हो सकती है।
  • दूरस्थ क्षेत्रों में विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्टिविटी चुनौती बनी हुई है।
  • केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच एकीकरण जटिल है।
  • कई MSMEs और स्टार्टअप अभी भी उपलब्ध डिजिटल सेवाओं से अनभिज्ञ हैं, जिससे अपनाने की गति धीमी है।
  • अरबों डिजिटल लेन-देन के साथ धोखाधड़ी और डेटा उल्लंघन के विरुद्ध सुदृढ़ सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं।

निष्कर्ष

  • भारत के डिजिटल सुधारों ने व्यापार वातावरण को परिवर्तित कर दिया है, जिससे अनुमोदन, पंजीकरण और व्यापार प्रक्रियाएँ कुशल एवं पारदर्शी हो गई हैं।
  • एआई, स्वचालन और मजबूत डिजिटल अवसंरचना का उपयोग कर ये पहल लागत कम करती हैं, नवाचार को प्रोत्साहित करती हैं और अनुपालन को सरल बनाती हैं, जिससे भारत एक सुरक्षित, निवेशक-अनुकूल एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धी गंतव्य के रूप में स्थापित हो रहा है।

Source  :PIB

 

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